शनिवार, 13 जून 2015

हर एक फ्रेंड ज़रुरी होता है ।



किसी ने सही ही कहा कि लालू और नीतीश रोशनी में ही कपड़े बदल रहे हैं , बिहार में जनता परिवार के नाम पर जो कुछ हुआ  वो इतना सिंथेटिक दिखा कि उसके आगे 'पॉलिएस्टर' के कपड़े की कृत्रिमता भी कम मॉडिफाइड लगे । सांप्रदायिकतावाद के खिलाफ़ कुर्बानी ज़रुरी है....सही है बिल्कुल , कुर्बानी न हो गई मोबाइल प्रोवाइडर कंपनी की वो एड हो गई जिसमें वो गाना चलता है ..... हर एक फ्रेंड जरुरी होता है ,  लालू यादव जानते हैं कि इस वक्त नीतीश के लिए वो नहीं, उनके लिए नीतीश कुमार बेहद ज़रुरी हैं । यानि लालू यादव तो एकला चलो का सोच भी नहीं सकते ।

नीतीश को नेता मानने के अलावा कोई चारा है ही नहीं,  खुद लड़ सकते नहीं,  पत्नी और बच्चों पर अब दांव खेलने का मतलब जगहंसाई के अलावा कुछ है नहीं तो करते क्या.... नीतीश और लालू के बीच समझौता होने से पहले पावरप्ले की जो  नौटंकी कुछ दिन चलती रही उसने बिहार के दोनों खांटी राजनेताओं के बीच 'शुद्ध देसी ब्रोमांस' के ऐसे  नज़ारे दिखाए  जिसके बाद इनकी दोस्ती के लंबे चलने पर शुबहा तो खड़ा हो ही जाता है , क्योंकि रोमांस के बाद दोस्ती तो कुदरत के नियमों के ही खिलाफ़ है ।  कांग्रेस आरजेडी को भाव दे नहीं रहा , तो लालू अब करें क्या नीतीश के आगे सिर  झुकाने के अलावा फिलहाल कोई रास्ता नहीं दिखता ।

सिचुएशन कुछ ऐसी है जिसमें दोनों अब 'फ्रेनेमी' बन गए हैं, 'फ्रेनेमी बोले तो रिश्ते के बीच एक महीन सी लाईन है जहां एक तरफ फ्रेंडशिप तो दूसरी ओर 'एनमिटी' की दीवार । अब बिहार चुनाव तक तो नीतीश और लालू को  'फ्रेनेमी ज़ोन' में ही रहना पड़ेगा


समाजवादियों के इकट्ठे होने का राग जिस तानपुरे से छेड़ा गया वो  कब का भोथरा हो गया है , इसलिए हम एक हैं का राग इतना बेसुरा है कि कान में दर्द ही होने लग जाए । शरद यादव, मुलायम जैसे साइड कैरेक्टर्स की मौजूदगी में  लालू-नीतीश स्टारर  बिहार लवस्टोरी 2015 का अंत कैसे होगा इसका अंदाज़ा भी लगाना बेकार है , ये अलग बात है कि इस सबने बिहार चुनाव की ऐसी पटकथा लिख दी है जिसमें सब तरह के फॉर्मूला मसालों की गंध अभी से दर्शको यानि वोटरों को आने लगी है ।

चुनौती वही है क्या इस सब सियासी नाटक के बीच बिहार का वोटर   इस सतही मनोरंजन का हिस्सा बनने के लिए फिर से फ्रंट सीट की टिकट लेगा या फिर कुछ फैसला सोच समझकर भी लिया जाएगा । लेकिन लोग करें भी तो क्या विकल्प है भी नहीं...डेविड धवन मसाला नहीं तो फिर रोहित शेट्टी का एक्शन ...च्वाइस बिहार की जनता की है ।

1 टिप्पणी:

  1. जीते कोई भी, हारेगा बिहार का आम बाशिंदा ही.......

    जय हिंद...

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